श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,  »  श्लोक 249
 
 
श्लोक  3.2.249 
সে বিকার কহিতে বাশক্তি আছে কার
নযনে বহযে সুরধুনী-শত-ধার
से विकार कहिते वाशक्ति आछे कार
नयने वहये सुरधुनी-शत-धार
 
 
अनुवाद
भगवान के प्रेमरूपी रूपान्तरण का वर्णन कौन कर सकता है? उनके नेत्रों से गंगा की सैकड़ों धाराओं के समान अश्रुधारा बह रही थी।
 
Who can describe the Lord's transformation into love? Tears flowed from His eyes like hundreds of streams of the Ganges.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)