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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,
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श्लोक 247
श्लोक
3.2.247
কত-ক্ষণে ভক্ত-গণ আসিযা মিলিলা
আসিযাই মুকুন্দাদি গাইতে লাগিলা
कत-क्षणे भक्त-गण आसिया मिलिला
आसियाइ मुकुन्दादि गाइते लागिला
अनुवाद
थोड़ी ही देर में भक्तगण वहाँ आ गये और मुकुन्द ने तुरन्त गाना शुरू कर दिया।
Within a short time the devotees arrived there and Mukunda immediately started singing.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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