श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,  »  श्लोक 241
 
 
श्लोक  3.2.241 
নিজ প্রিয সঙ্করের বিভব দেখিযান্
ঋত্য করে গৌরচন্দ্র পরানন্দ হঞা
निज प्रिय सङ्करेर विभव देखियान्
ऋत्य करे गौरचन्द्र परानन्द हञा
 
 
अनुवाद
अपने प्रिय भक्त शंकर के ऐश्वर्य को देखकर गौरचन्द्र आनंद में नाचने लगे।
 
Seeing the opulence of his beloved devotee Shankar, Gaurachandra started dancing in joy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)