श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,  »  श्लोक 239
 
 
श्लोक  3.2.239 
বহুবিধ বাদ্য উঠিযাছে কোলাহল
চতুর্-দিগে নৃত্য-গীত পরম মঙ্গল
बहुविध वाद्य उठियाछे कोलाहल
चतुर्-दिगे नृत्य-गीत परम मङ्गल
 
 
अनुवाद
नाना प्रकार के वाद्यों की ध्वनि गूंज रही थी और चारों दिशाएँ मंगलमय नृत्य और गायन से भर गयीं।
 
The sound of various types of musical instruments was echoing and all four directions were filled with auspicious dance and singing.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)