श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,  »  श्लोक 218
 
 
श्लोक  3.2.218 
আপনার দণ্ড প্রভু ভাঙ্গিযা আপনে
তাঙ্র দণ্ড ভাঙ্গিতে কি পারে অন্য জনে?”
आपनार दण्ड प्रभु भाङ्गिया आपने
ताङ्र दण्ड भाङ्गिते कि पारे अन्य जने?”
 
 
अनुवाद
"भगवान ने अपना दण्ड स्वयं तोड़ दिया। और कौन है जो इसे तोड़ सके?"
 
"God broke his own punishment. Who else can break it?"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)