श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,  »  श्लोक 217
 
 
श्लोक  3.2.217 
বার্তা জিজ্ঞাসেন,—“দণ্ড ভাঙ্গিলেক কে?”
নিত্যানন্দ বলে,—“দণ্ড ধরিলেক যে
वार्ता जिज्ञासेन,—“दण्ड भाङ्गिलेक के?”
नित्यानन्द बले,—“दण्ड धरिलेक ये
 
 
अनुवाद
उन्होंने पूछा, “दण्ड किसने तोड़ा?” नित्यानंद ने उत्तर दिया, “जिसने उसे पकड़ा था।
 
He asked, “Who broke the stick?” Nityananda replied, “The one who caught it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)