श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,  »  श्लोक 209
 
 
श्लोक  3.2.209 
ঈশ্বরের ইচ্ছা-মাত্র ঈশ্বর সে জানে
কেন ভাঙ্গিলেন দণ্ড, জানিব কেমনে
ईश्वरेर इच्छा-मात्र ईश्वर से जाने
केन भाङ्गिलेन दण्ड, जानिब केमने
 
 
अनुवाद
परमेश्वर की इच्छा तो केवल परमेश्वर ही जानते हैं। मैं कैसे जानूँगा कि उन्होंने दंड क्यों तोड़ा?
 
Only God knows God's will. How do I know why they broke the rod?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)