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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,
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श्लोक 205
श्लोक
3.2.205
আথে-ব্যথে নিত্যানন্দ দণ্ড ধরিঽ করে
বসিলেন সেই স্থানে বিহ্বল-অন্তরে
आथे-व्यथे नित्यानन्द दण्ड धरिऽ करे
वसिलेन सेइ स्थाने विह्वल-अन्तरे
अनुवाद
व्याकुल हृदय से नित्यानंद ने दण्ड पकड़ लिया और वहीं बैठ गये।
With a troubled heart, Nityananda took hold of the staff and sat down there.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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