श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,  »  श्लोक 201
 
 
श्लोक  3.2.201 
নিত্যানন্দ-কৃপায এ সব শক্তি হয
নিরবধি গৌরচন্দ্র যাঙ্হার হৃদয
नित्यानन्द-कृपाय ए सब शक्ति हय
निरवधि गौरचन्द्र याङ्हार हृदय
 
 
अनुवाद
ये सभी लीलाएँ नित्यानन्द की कृपा से ही संभव हुईं, क्योंकि गौरचन्द्र सदैव उनके हृदय में निवास करते हैं।
 
All these pastimes were possible only by the grace of Nityananda, because Gaurachandra always resides in his heart.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)