श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,  »  श्लोक 141
 
 
श्लोक  3.2.141 
কিছু চিন্তা নহি, কর কৃষ্ণ-সঙ্কীর্তন
তোরা কি না দেখ-হের ফিরে সুদর্শন”
किछु चिन्ता नहि, कर कृष्ण-सङ्कीर्तन
तोरा कि ना देख-हेर फिरे सुदर्शन”
 
 
अनुवाद
"चिंता मत करो। कृष्ण की महिमा का गुणगान करो। क्या तुम सुदर्शन को हमारी रक्षा करते नहीं देख रहे?"
 
"Don't worry. Sing the glories of Krishna. Don't you see Sudarshan protecting us?"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)