श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.2.14 
প্রভু বলে,—“যে-সে-কেনে উত্পাত না হয
অবশ্য চলিব মুঞি কহিনু নিশ্চয”
प्रभु बले,—“ये-से-केने उत्पात ना हय
अवश्य चलिब मुञि कहिनु निश्चय”
 
 
अनुवाद
प्रभु ने कहा, “मैंने निर्णय लिया है कि मुझे किसी भी व्यवधान की परवाह किये बिना जाना ही होगा।”
 
The Lord said, “I have decided that I must go regardless of any obstacles.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)