श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,  »  श्लोक 137
 
 
श्लोक  3.2.137 
এতেকে যাবত উডিযার দেশে পাই
তাবত নীরব হও সকল গোসাঞি!”
एतेके यावत उडियार देशे पाइ
तावत नीरब हओ सकल गोसाञि!”
 
 
अनुवाद
“अतः हे गोसाणियों, जब तक हम उड़ीसा न पहुँच जाएँ, कृपया मौन रहें!”
 
“So, O Gosanis, please remain silent until we reach Orissa!”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)