श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,  »  श्लोक 127
 
 
श्लोक  3.2.127 
ইহারে সে কহি প্রেম-ময-অবতার
এ শক্তি চৈতন্যচন্দ্র বিনে নাহি আর
इहारे से कहि प्रेम-मय-अवतार
ए शक्ति चैतन्यचन्द्र विने नाहि आर
 
 
अनुवाद
इसीलिए उन्हें भगवद्प्रेम का अवतार कहा गया है। चैतन्यचंद्र के अलावा किसी में ऐसी शक्ति नहीं थी।
 
That is why he is called the embodiment of divine love. No one except Chaitanyachandra possessed such power.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)