श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 2: भगवान के भुवनेश्वर और अन्य स्थानों से जगन्नाथ पुरी तक के यात्रा का वर्णन,  »  श्लोक 103
 
 
श्लोक  3.2.103 
শুনিযা হৈলা সুখী বৈকুণ্ঠের নাথ
হাসিঽ তানে করিলেন শুভ দৃষ্টি-পাত
शुनिया हैला सुखी वैकुण्ठेर नाथ
हासिऽ ताने करिलेन शुभ दृष्टि-पात
 
 
अनुवाद
उसके शब्द सुनकर वैकुण्ठ के स्वामी मुस्कुराये और उस पर दया भरी दृष्टि डाली।
 
Hearing his words, the Lord of Vaikuntha smiled and looked at him with pity.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)