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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 10: श्री पुण्डरीक विद्यानिधि की महिमा
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श्लोक 94
श्लोक
3.10.94
আপনেই উপাসক, উপাস্য আপনে
কে বুঝে তাহান মন, তান কৃপা বিনে
आपनेइ उपासक, उपास्य आपने
के बुझे ताहान मन, तान कृपा विने
अनुवाद
भगवान चैतन्य स्वयं पूज्य और पूजनीय थे। परन्तु उनकी कृपा के बिना उनके मन को कौन समझ सकता था?
Lord Chaitanya himself was worthy of worship and reverence. But without his grace, who could understand his mind?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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