श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 10: श्री पुण्डरीक विद्यानिधि की महिमा  »  श्लोक 91
 
 
श्लोक  3.10.91 
মৃদঙ্গ, মুহরী, শঙ্খ, দুন্দূভি, কাহাল
ঢাক, দগড, কাডা বাজাযে বিশাল
मृदङ्ग, मुहरी, शङ्ख, दुन्दूभि, काहाल
ढाक, दगड, काडा बाजाये विशाल
 
 
अनुवाद
मृदंग, मुहरी, शंख, ढोल, काहल, ढोलक, दगड़ और काढ़ा जोर-जोर से बजाए जा रहे थे।
 
Mridang, Muhri, Shankh, Dhol, Kahal, Dholak, Dagad and Kadha were being played loudly.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)