श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 10: श्री पुण्डरीक विद्यानिधि की महिमा  »  श्लोक 83
 
 
श्लोक  3.10.83 
অহঙ্কার তান দেহে নাহি তিলমাত্র
না বুঝি কি অদ্ভুত চৈতন্য-কৃপা-পাত্র
अहङ्कार तान देहे नाहि तिलमात्र
ना बुझि कि अद्भुत चैतन्य-कृपा-पात्र
 
 
अनुवाद
उनके व्यक्तित्व में मिथ्या अहंकार का लेशमात्र भी नहीं था। भगवान चैतन्य की ओर से उन्हें जो अद्भुत कृपा प्राप्त हुई, उसे मैं समझ नहीं पा रहा हूँ।
 
There was not even a trace of false ego in his personality. I cannot understand the amazing grace he received from Lord Chaitanya.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)