vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
»
अध्याय 10: श्री पुण्डरीक विद्यानिधि की महिमा
»
श्लोक 80
श्लोक
3.10.80
আর কি কহিব প্রেমনিধির মহিমাযাঙ্
র শিষ্য গদাধর এই প্রেম-সীমা
आर कि कहिब प्रेमनिधिर महिमायाङ्
र शिष्य गदाधर एइ प्रेम-सीमा
अनुवाद
प्रेमनिधि की महिमा के बारे में मैं और क्या कहूँ? उनके प्रेम की सीमा इसी बात से समझ में आती है कि उनके गदाधर पंडित जैसे शिष्य थे।
What more can I say about the greatness of Premanidhi? The extent of his love is evident from the fact that he had a disciple like Gadadhara Pandit.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×