श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 10: श्री पुण्डरीक विद्यानिधि की महिमा  »  श्लोक 67
 
 
श्लोक  3.10.67 
এই মতে ভক্তি-রসে ঈশ্বর বিহরে
বিদ্যানিধি আইলেন জানিঞা অন্তরে
एइ मते भक्ति-रसे ईश्वर विहरे
विद्यानिधि आइलेन जानिञा अन्तरे
 
 
अनुवाद
जब भगवान इस प्रकार भक्ति रस का आनन्द ले रहे थे, तब उन्होंने समझ लिया कि पुण्डरीक विद्यानिधि आ गयी है।
 
When the Lord was enjoying the bliss of devotion in this way, he understood that Pundarik Vidyanidhi had arrived.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)