श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 10: श्री पुण्डरीक विद्यानिधि की महिमा  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  3.10.61 
সেই ক্ষণে কূপ হৈল নবনীত-ময
প্রভুর শ্রী-অঙ্গে কিছু ক্ষত নাহি হয
सेइ क्षणे कूप हैल नवनीत-मय
प्रभुर श्री-अङ्गे किछु क्षत नाहि हय
 
 
अनुवाद
जब भगवान गिरे तो कुआं मक्खन जैसा हो गया, इसलिए उनके शरीर पर खरोंच तक नहीं आई।
 
When the Lord fell, the well became like butter, so there was not even a scratch on his body.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)