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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 10: श्री पुण्डरीक विद्यानिधि की महिमा
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श्लोक 60
श्लोक
3.10.60
কিছু না জানেন প্রভু প্রেম-ভক্তি-রসে
বালকের প্রায যেন কূপে পডি’ ভাসে
किछु ना जानेन प्रभु प्रेम-भक्ति-रसे
बालकेर प्राय येन कूपे पडि’ भासे
अनुवाद
भगवान परमानंद में मग्न थे, इसलिए उन्हें समझ नहीं आया कि क्या हुआ। वे बस एक बच्चे की तरह उस कुएँ में तैरते रहे।
The Lord was so absorbed in ecstasy that he did not understand what had happened. He simply floated in the well like a child.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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