श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 10: श्री पुण्डरीक विद्यानिधि की महिमा  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  3.10.43 
দামোদর-স্বরূপ—সঙ্গীত-রস-ময
যাঙ্র ধ্বনি-শ্রবণে প্রভুর নৃত্য হয
दामोदर-स्वरूप—सङ्गीत-रस-मय
याङ्र ध्वनि-श्रवणे प्रभुर नृत्य हय
 
 
अनुवाद
दामोदर स्वरूप मधुर गायन कला में निपुण थे। भगवान जब भी उन्हें गाते सुनते, नाच उठते।
 
Damodara Swarup was adept at melodious singing. Whenever the Lord heard him sing, he would dance.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)