श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 10: श्री पुण्डरीक विद्यानिधि की महिमा  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  3.10.29 
সর্বজ্ঞ-চূডামণি—জানেন সকল
“বিদ্যানিধি শীঘ্র-গতি আসিবে উত্কল
सर्वज्ञ-चूडामणि—जानेन सकल
“विद्यानिधि शीघ्र-गति आसिबे उत्कल
 
 
अनुवाद
सर्वज्ञ पुरुषों के शिरोमणि सब कुछ जानते थे। उन्होंने कहा, "पुण्डरीक विद्यानिधि शीघ्र ही पुरी में आएँगे।"
 
The most knowledgeable of all, the supreme being, knew everything. He said, "Pundarik Vidyanidhi will soon arrive in Puri."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)