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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 10: श्री पुण्डरीक विद्यानिधि की महिमा
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श्लोक 181
श्लोक
3.10.181
পুণ্ডরীক-বিদ্যানিধি-চরিত্র শুনিলে
অবশ্য তাঙ্হারে কৃষ্ণ-পাদ-পদ্ম মিলে
पुण्डरीक-विद्यानिधि-चरित्र शुनिले
अवश्य ताङ्हारे कृष्ण-पाद-पद्म मिले
अनुवाद
जो कोई पुण्डरीक विद्यानिधि के लक्षण सुनेगा, वह निश्चय ही कृष्ण के चरणकमलों को प्राप्त करेगा।
Whoever hears the characteristics of Pundarik Vidyanidhi will certainly attain the lotus feet of Krishna.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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