vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
»
अध्याय 10: श्री पुण्डरीक विद्यानिधि की महिमा
»
श्लोक 161
श्लोक
3.10.161
“সকালে আইস জগন্নাথ-দরশনে
আজি শযা হৈতে নাহি উঠে কি কারণে?”
“सकाले आइस जगन्नाथ-दरशने
आजि शया हैते नाहि उठे कि कारणे?”
अनुवाद
"हर सुबह तुम मेरे साथ जगन्नाथ के दर्शन करने आते हो। आज तुम अभी तक क्यों नहीं उठे?"
"Every morning you come with me to visit Jagannath. Why haven't you woken up yet today?"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×