যবনের কি দায, যে ব্রাহ্মণ সজ্জন
তারা যত অপরাধ করে অনুক্ষণ
অপরাধ হৈলে দুই লোকে দুঃখ পায
স্বপ্নেহো অভক্ত পাপিষ্ঠেরে নাশিখায
यवनेर कि दाय, ये ब्राह्मण सज्जन
तारा यत अपराध करे अनुक्षण
अपराध हैले दुइ लोके दुःख पाय
स्वप्नेहो अभक्त पापिष्ठेरे नाशिखाय
अनुवाद
यवनों की तो बात ही क्या, यहाँ तक कि जो प्रतिष्ठित ब्राह्मण निरंतर अपराध करते रहते हैं, वे भी अपने अपराधों के फलस्वरूप इस जन्म में और अगले जन्म में दुःख प्राप्त करते हैं। फिर भी भगवान ऐसे पापी अभक्तों को स्वप्न में भी शिक्षा नहीं देते।
Forget about the Yavanas, even the respected brahmanas who constantly commit crimes suffer in this life and the next as a result of their crimes. Yet the Lord does not teach such sinful non-devotees even in dreams.
तात्पर्य
सर्वशक्तिशाली प्रभु सदा सभी अघभक्तों को दण्ड या पुरस्कार देने से दूर ही रहते हैं। परन्तु चूंकि वे भक्तों की अच्छी तरह से कामना करते हैं, इसलिए वे अपने प्रिय भक्तों को सपनों में दण्ड देकर उनका सुधार करते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥