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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 10: श्री पुण्डरीक विद्यानिधि की महिमा
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श्लोक 145
श्लोक
3.10.145
দেখ দেখ এই বিদ্যানিধির মহিমা
সেবকেরে দযা যত, তার এই সীমা
देख देख एइ विद्यानिधिर महिमा
सेवकेरे दया यत, तार एइ सीमा
अनुवाद
पुण्डरीक विद्यानिधि की महिमा तो देखो! यह भगवान की अपने भक्तों पर असीम कृपा है।
Behold the glory of the Pundarik Vidyanidhi! This is the Lord's infinite mercy upon his devotees.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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