vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
»
अध्याय 10: श्री पुण्डरीक विद्यानिधि की महिमा
»
श्लोक 142
श्लोक
3.10.142
স্বপ্ন দেখি’ বিদ্যানিধি জাগিযা উঠিলা
গালে চড দেখি’ সব হাসিতে লাগিলা
स्वप्न देखि’ विद्यानिधि जागिया उठिला
गाले चड देखि’ सब हासिते लागिला
अनुवाद
यह स्वप्न देखकर पुण्डरीक विद्यानिधि की नींद खुली, तो उसने अपने गालों पर थप्पड़ों के निशान देखे और हँसने लगा।
When Pundrik Vidyanidhi woke up after seeing this dream, he saw the marks of slaps on his cheeks and started laughing.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×