श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 10: श्री पुण्डरीक विद्यानिधि की महिमा  »  श्लोक 124
 
 
श्लोक  3.10.124 
এই-মত রঙ্গে-ঢঙ্গে দুই প্রিয-সখা
চলিলেন কৃষ্ণ-কার্যে যাঙ্র যথা বাসা
एइ-मत रङ्गे-ढङ्गे दुइ प्रिय-सखा
चलिलेन कृष्ण-कार्ये याङ्र यथा वासा
 
 
अनुवाद
इस प्रकार दोनों घनिष्ठ मित्र अपने कृष्णभावनामृत कर्तव्यों का पालन करने के लिए अपने निवास स्थान पर चले गए।
 
Thus both the close friends went to their respective residences to perform their Krishna consciousness duties.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)