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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 10: श्री पुण्डरीक विद्यानिधि की महिमा
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श्लोक 113
श्लोक
3.10.113
রাজপাত্র অবুধ যে ইহা না বিচারে
রাজাও মাণ্ডুযা-বস্ত্র দেন নিজ-শিরে”
राजपात्र अबुध ये इहा ना विचारे
राजाओ माण्डुया-वस्त्र देन निज-शिरे”
अनुवाद
"सरकारी अधिकारी अज्ञानी हैं, क्योंकि वे इस बात पर विचार नहीं करते। राजा भी अपने सिर पर यह कलफदार कपड़ा लपेटता है।"
"Government officials are ignorant because they don't consider this. Even the king wears this starched cloth around his head."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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