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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 10: श्री पुण्डरीक विद्यानिधि की महिमा
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श्लोक 108
श्लोक
3.10.108
ঈশ্বরের ইচ্ছা যদি না থাকে অন্তরে
তবে দেখ রাজা কেনে নিষেধ না করে”
ईश्वरेर इच्छा यदि ना थाके अन्तरे
तबे देख राजा केने निषेध ना करे”
अनुवाद
“यदि यह भगवान जगन्नाथ की इच्छा नहीं थी, तो राजा ने इसे रोका क्यों नहीं?”
“If this was not the wish of Lord Jagannath, why did the king not stop it?”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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