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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 10: श्री पुण्डरीक विद्यानिधि की महिमा
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श्लोक 106
श्लोक
3.10.106
দামোদর-স্বরূপ কহেন,—“শুন কথা
দেশাচারে ইথে দোষ না লযেন এথা
दामोदर-स्वरूप कहेन,—“शुन कथा
देशाचारे इथे दोष ना लयेन एथा
अनुवाद
स्वरूप दामोदर ने उत्तर दिया, "कृपया सुनिए। इसमें कोई दोष नहीं है, क्योंकि यही इस स्थान की रीति है।"
Svarupa Damodara replied, "Please listen. There is no fault in this, because this is the custom of this place."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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