श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 1: श्री अद्वैत आचार्य के घर में फिर मिलना  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  3.1.60 
স্বভাব-সুন্দর স্থান শোভে গাভী-গণে
দেখিযা আবিষ্ট প্রভু হয সেই ক্ষণে
स्वभाव-सुन्दर स्थान शोभे गाभी-गणे
देखिया आविष्ट प्रभु हय सेइ क्षणे
 
 
अनुवाद
उस सुन्दर, प्राकृतिक वातावरण में गायों के झुंड को देखकर भगवान तुरन्त ही परमानंद में लीन हो गये।
 
Seeing the herd of cows in that beautiful, natural environment, the Lord immediately became absorbed in ecstasy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)