श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 1: श्री अद्वैत आचार्य के घर में फिर मिलना  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  3.1.59 
রাঢ-দেশ ভূমি যত দেখিতে সুন্দর
চতুর্-দিকে অশ্বত্থ-মণ্ডলী মনোহর
राढ-देश भूमि यत देखिते सुन्दर
चतुर्-दिके अश्वत्थ-मण्डली मनोहर
 
 
अनुवाद
राधा-देश की भूमि सभी दिशाओं में मनमोहक बरगद के वृक्षों से सुशोभित थी।
 
The land of Radha-desh was adorned with enchanting banyan trees in all directions.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)