श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 1: श्री अद्वैत आचार्य के घर में फिर मिलना  »  श्लोक 289
 
 
श्लोक  3.1.289 
পুনঃ প্রভু-সঙ্গে ভক্ত-গণ দরশন
পুনর্-বার ঐশ্বর্য-আবেশে সঙ্কীর্তন
पुनः प्रभु-सङ्गे भक्त-गण दरशन
पुनर्-बार ऐश्वर्य-आवेशे सङ्कीर्तन
 
 
अनुवाद
इस प्रकार भक्तों ने पुनः भगवान से भेंट की और पुनः बड़ी धूमधाम से संकीर्तन किया।
 
In this way the devotees again met the Lord and again performed Sankirtan with great pomp and show.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)