श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 1: श्री अद्वैत आचार्य के घर में फिर मिलना  »  श्लोक 239
 
 
श्लोक  3.1.239 
সপার্ষদে নৃত্য করে বৈকুণ্ঠ ঈশ্বর
এ-মত অপূর্ব হয পৃথিবী-ভিতর
सपार्षदे नृत्य करे वैकुण्ठ ईश्वर
ए-मत अपूर्व हय पृथिवी-भितर
 
 
अनुवाद
वैकुंठ के स्वामी अपने गणों के साथ नृत्य कर रहे थे। इस संसार में ऐसी अद्भुत लीलाएँ घटित हो रही थीं।
 
The Lord of Vaikuntha was dancing with his followers. Such wonderful pastimes were taking place in this world.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)