श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 1: श्री अद्वैत आचार्य के घर में फिर मिलना  »  श्लोक 232
 
 
श्लोक  3.1.232 
কিবা সে মধুর পদ-চালন-ভঙ্গি
মাকিবা সে শ্রী-হস্ত-চালনাদির মহিমা
किबा से मधुर पद-चालन-भङ्गि
माकिबा से श्री-हस्त-चालनादिर महिमा
 
 
अनुवाद
उनके पैरों की गति कितनी मधुर थी, और उनके हाथों की गति कितनी महिमापूर्ण थी!
 
How sweet were the movements of His feet, and how glorious were the movements of His hands!
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)