श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 1: श्री अद्वैत आचार्य के घर में फिर मिलना  »  श्लोक 225
 
 
श्लोक  3.1.225 
আর্ত-নাদে রোদন করযে ভক্ত-গণ
শুনিযা পবিত্র হয সকল ভুবন
आर्त-नादे रोदन करये भक्त-गण
शुनिया पवित्र हय सकल भुवन
 
 
अनुवाद
भक्तों के दुःख में रोने के कंपन ने संपूर्ण विश्व को पवित्र कर दिया।
 
The vibrations of the devotees crying in grief purified the entire world.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)