श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 1: श्री अद्वैत आचार्य के घर में फिर मिलना  »  श्लोक 192
 
 
श्लोक  3.1.192 
হেন সে আনন্দ জন্মিঽ আছযে অন্তরে
সর্ব-লোক ভাসে মহা আনন্দ-সাগরে
हेन से आनन्द जन्मिऽ आछये अन्तरे
सर्व-लोक भासे महा आनन्द-सागरे
 
 
अनुवाद
उनके हृदय में ऐसा आनंद छा गया कि वे सब आनंद के सागर में तैरने लगे।
 
Such joy filled their hearts that they all started swimming in the ocean of joy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)