श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 1: श्री अद्वैत आचार्य के घर में फिर मिलना  »  श्लोक 126
 
 
श्लोक  3.1.126 
তবে প্রভু সর্ব ভক্ত-গণ করিঽ সঙ্গে
নীলাচল-প্রতি শুভ করিলেন রঙ্গে
तबे प्रभु सर्व भक्त-गण करिऽ सङ्गे
नीलाचल-प्रति शुभ करिलेन रङ्गे
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् भगवान् भक्तों सहित प्रसन्नतापूर्वक नीलांचल को चले गये।
 
After that the Lord happily went to Nilanchal along with the devotees.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)