श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 1: श्री अद्वैत आचार्य के घर में फिर मिलना  »  श्लोक 104
 
 
श्लोक  3.1.104 
আচম্বিতে শিশু-মুখে শুনিঽ হরি-ধ্বনি
কি হেতু ইহার সবে কহ দেখি শুনি?”
आचम्बिते शिशु-मुखे शुनिऽ हरि-ध्वनि
कि हेतु इहार सबे कह देखि शुनि?”
 
 
अनुवाद
"अब अचानक मुझे एक बच्चे का हरि नाम जपते हुए सुनाई दे रहा है। इसका क्या कारण है?"
 
"Now suddenly I hear a child chanting Hari's name. What is the reason for this?"
तात्पर्य
जब श्री गौरासुंदर ने अचानक से कुछ चरवाहे बच्चों से हरि नाम सुना तो वे उत्सुक हो गए और यह जानने को इच्छुक हुए कि वे बच्चे कौन है। जहां कहीं भी गंगा बहती है वहां हरि नाम की भक्ति का प्रचार होता है। इसी कारण गंगा की महिमा है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)