श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन  »  श्लोक 85
 
 
श्लोक  2.9.85 
সহস্র সহস্র ভাণ্ড দধি, ক্ষীর, দুগ্ধ
সহস্র সহস্র কান্দি-কলা, কত মুদ্গ
सहस्र सहस्र भाण्ड दधि, क्षीर, दुग्ध
सहस्र सहस्र कान्दि-कला, कत मुद्ग
 
 
अनुवाद
उन्होंने हजारों बर्तन दही, गाढ़ा दूध, हजारों गुच्छे केले और बड़ी मात्रा में भिगोई हुई मूंग दाल भेंट की।
 
He offered thousands of pots of curd, condensed milk, thousands of bunches of bananas and large quantities of soaked moong dal.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)