श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन  »  श्लोक 82
 
 
श्लोक  2.9.82 
কেহ দেয মোযা, জম্বু, কর্কটিকা ফল
কেহ দেয ইক্ষু, কেহ দেয গঙ্গা-জল
केह देय मोया, जम्बु, कर्कटिका फल
केह देय इक्षु, केह देय गङ्गा-जल
 
 
अनुवाद
कुछ लोगों ने चावल, गुलाब और खीरे से बनी मिठाइयाँ चढ़ाईं, कुछ ने गन्ना चढ़ाया, और कुछ ने गंगाजल चढ़ाया।
 
Some people offered sweets made of rice, roses and cucumbers, some offered sugarcane, and some offered Ganga water.
तात्पर्य
कृकटिकफल वाक्यांश से तात्पर्य कंकुडा [बंगाली में, या काकडी हिंदी में] (खीरे के प्रकार) से हैं, और जाम्बू शब्द से तात्पर्य गुलाब के सेब से हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)