श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन  »  श्लोक 78
 
 
श्लोक  2.9.78 
প্রভুর শ্রী-হস্তে সব দেই ভক্ত-গণ
অমাযায মহাপ্রভু করেন ভোজন
प्रभुर श्री-हस्ते सब देइ भक्त-गण
अमायाय महाप्रभु करेन भोजन
 
 
अनुवाद
भक्तों ने ये सभी वस्तुएं सीधे महाप्रभु के हाथों में दे दीं, जिन्होंने सच्चे मन से सब कुछ खा लिया।
 
The devotees gave all these items directly into the hands of Mahaprabhu, who ate everything with a true heart.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)