श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन  »  श्लोक 77
 
 
श्लोक  2.9.77 
কেহ দেই কদলক, কেহ দিব্য মুদ্গ
দেহ দধি, ক্ষীর বা নবনী, কেহ দুগ্ধ
केह देइ कदलक, केह दिव्य मुद्ग
देह दधि, क्षीर वा नवनी, केह दुग्ध
 
 
अनुवाद
किसी ने केले पेश किए, किसी ने भिगोई हुई मूंग दाल पेश की, और अन्य ने दही, गाढ़ा दूध, मक्खन और दूध पेश किया।
 
Some offered bananas, some offered soaked moong dal, and others offered curd, condensed milk, butter and milk.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)