श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन  »  श्लोक 70
 
 
श्लोक  2.9.70 
দূর্বা, ধান্য, তুলসী লৈযা সর্ব-জনে
পাইযা অভয সবে দেন শ্রী-চরণে
दूर्वा, धान्य, तुलसी लैया सर्व-जने
पाइया अभय सबे देन श्री-चरणे
 
 
अनुवाद
उन्होंने निर्भय होकर भगवान के चरण कमलों में ताजी घास, धान और तुलसी अर्पित की।
 
He fearlessly offered fresh grass, paddy and Tulsi at the Lord's lotus feet.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)