श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन  »  श्लोक 67
 
 
श्लोक  2.9.67 
নানা-বিধ ধাতু-পাত্র দেই সর্ব-জনে
না জানি কতেক আসিঽ পডে শ্রী-চরণে
नाना-विध धातु-पात्र देइ सर्व-जने
ना जानि कतेक आसिऽ पडे श्री-चरणे
 
 
अनुवाद
उन्होंने नाना प्रकार के धातु के पात्र अर्पित किए। कोई नहीं जानता था कि कितने लोग उनके चरण कमलों पर गिरे।
 
He offered vessels of various kinds of metal. No one knew how many people fell at his lotus feet.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)