श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  2.9.65 
কেহ রত্ন-সুবর্ণ-রজত-অলঙ্কার
পাদ-পদ্মে দিযা দিযা করে নমস্কার
केह रत्न-सुवर्ण-रजत-अलङ्कार
पाद-पद्मे दिया दिया करे नमस्कार
 
 
अनुवाद
किसी ने उनके चरणकमलों पर सोने, चांदी और रत्नों से बने आभूषण अर्पित किए और फिर प्रणाम किया।
 
Someone offered ornaments made of gold, silver and gems at his lotus feet and then bowed down.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)