श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन  »  श्लोक 64
 
 
श्लोक  2.9.64 
দিব্য গন্ধ আনিঽ কেহ লেপে শ্রী-চরণে
তুলসী কমলে মেলিঽ পূজে কোন জনে
दिव्य गन्ध आनिऽ केह लेपे श्री-चरणे
तुलसी कमले मेलिऽ पूजे कोन जने
 
 
अनुवाद
किसी ने सुगंधित चंदन का लेप लाकर उनके चरणकमलों पर लगाया, तो किसी ने तुलसीदल अर्पित कर पूजा की।
 
Someone brought fragrant sandalwood paste and applied it on his feet, while someone else worshipped him by offering basil leaves.
तात्पर्य
हरि-भक्ति-विलास (6.114) में उद्धृत निम्नलिखित वैदिक कथन के अनुसार: चन्दनागुरु-कपूर-पङ्कं गंधं इहोच्यते-"गंध शब्द चन्दन के लेप, अगर और कपूर के मिश्रण को कहते हैं।" अन्यथा, हरि-भक्ति-विलास (6.115) में उद्धृत गरुड़ पुराण कथन के अनुसार: "गंध कस्तूरी के दो भाग, चंदन के चार भाग, कुंकुम के तीन भाग और कपूर के एक भाग के मिश्रण को कहते हैं। यह सर्वोच्च भगवान और सभी दिव्य व्यक्तित्वों को बहुत प्रिय है।"

'मेली' शब्द (मिला धातु से व्युत्पन्न) का अर्थ "मिलाना" या "संयोजित करना" है।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)