श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 9: भगवान का इक्कीस घंटे का भावोन्माद और श्रीधर और अन्य भक्तों के लक्षणों का वर्णन  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  2.9.61 
জয জয অদোষ-দরশি রমাকান্ত”
এই-মত স্তুতি করে সকল মহান্ত
जय जय अदोष-दरशि रमाकान्त”
एइ-मत स्तुति करे सकल महान्त
 
 
अनुवाद
"जो दूसरों के दोष नहीं देखते और लक्ष्मी के प्रिय भगवान हैं, उनकी जय हो!" इस प्रकार सभी महान भक्तों ने अपनी प्रार्थनाएँ प्रस्तुत कीं।
 
"Victory to the one who sees no faults in others and is the beloved Lord of Lakshmi!" Thus all the great devotees offered their prayers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)